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21वीं पशुधन गणना

चर्चा में क्यों ?

  • 31 मार्च, 2025 तक 21वीं पशुधन गणना पूरी होने की संभावना है 

प्रमुख बिंदु 

  • पशुधन गणना पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) का एक नियमित पंचवर्षीय (five-yearly) अभ्यास है। 
  • पहली पशुधन गणना वर्ष 1919 में की गई थी, और 20वीं पशुधन गणना 2019 में पूरी हुई थी।

21वीं पशुधन गणना की शुरुआत

  • आरंभ: 25 अक्टूबर, 2024
  • समाप्ति की संभावित तिथि: 31 मार्च, 2025
  • कुल गिनी जाने वाली प्रजातियाँ: 15
  • शामिल पशु: भैंस, बकरी, भेड़, याक, मिथुन, कुत्ता, खरगोश, सुअर, घोड़ा, टट्टू, गधा, खच्चर, ऊंट, हाथी और मुर्गी।

उद्देश्य एवं लक्ष्य

  • नीति निर्माण: पशुधन और नस्लों के रुझानों (trends) का आकलन करना।
  • संरक्षण एवं प्रजनन: देशी और विदेशी नस्लों का डेटा एकत्र करना।
  • पशुधन कल्याण: सरकारी योजनाओं और पहलों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करना।

प्रश्न  - भारत में पहली पशुधन गणना कब की गई थी ?

(a) वर्ष 1910

(b) वर्ष 1915

(c) वर्ष 1916

(d) वर्ष 1919

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