New
GS Foundation (P+M) - Delhi: 26 March, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj: 15 Feb, 10:30 AM Call Our Course Coordinator: 9555124124 GS Foundation (P+M) - Delhi: 26 March, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj: 15 Feb, 10:30 AM Call Our Course Coordinator: 9555124124

महाकुंभ में 8 लाख श्रद्धालुओं को आयुष सेवाओं का लाभ

चर्चा में  क्यों ?

  • महाकुंभ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय ने व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं।
  • महाकुंभ में 8 लाख श्रद्धालुओं को आयुष सेवाओं का लाभ प्राप्त हुआ 

समर्पित स्वास्थ्य सेवाएँ

  • आयुष मंत्रालय ने महाकुंभ मेले में स्वास्थ्य सेवा को सुलभ बनाने के लिए विभिन्न प्रयास किए
  • 20 आयुष ओपीडी केंद्र स्थापित किए ।
  • मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों की तैनाती से संपूर्ण मेला क्षेत्र में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
  • 90 से अधिक डॉक्टर और 150 स्वास्थ्यकर्मी 
  • महाशिवरात्रि स्नान के दौरान विशेष चिकित्सा व्यवस्थाएँ की गईं 

आयुष: भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली

  • आयुष भारत में प्रचलित आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा प्रणालियों का संक्षिप्त रूप है।
  • ये प्रणालियाँ समग्र दृष्टिकोण पर आधारित हैं और रोगों की रोकथाम व स्वास्थ्य संवर्धन पर केंद्रित हैं।

आयुष का उद्भव और विकास

  • 1995 में, इन प्रणालियों के विकास हेतु भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी विभाग (ISM & H) का गठन हुआ, जिसे 2003 में आयुष विभाग नाम दिया गया।
  • आयुर्वेद का आधार वैदिक ज्ञान और ऋषियों द्वारा विकसित सिद्ध प्रणाली एवं योग है।
  • यूनानी चिकित्सा 8वीं शताब्दी ईस्वी में भारत आई, जबकि होम्योपैथी 18वीं शताब्दी में जर्मनी में विकसित हुई और भारतीय चिकित्सा प्रणाली में समाहित हो गई।
  • प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित दवा रहित प्रणाली है।

आयुष की वर्तमान प्रासंगिकता

  • वैश्विक स्तर पर योग को स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत किया जा रहा है।
  • गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), जीवनशैली विकारों, दीर्घकालिक रोगों और बहु-दवा प्रतिरोधी रोगों के समाधान में आयुष पद्धतियाँ प्रभावी मानी जा रही हैं।
  • सरकार ने स्वास्थ्य देखभाल के बहुलवादी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया, जिससे आयुष चिकित्सा को संस्थागत समर्थन और जनस्वीकृति मिली।

आयुष बनाम जैव चिकित्सा

  • जैव चिकित्सा (एलोपैथी) ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित किया और सर्जिकल नवाचार किए।
  • लेकिन गैर-संचारी रोगों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए आयुष चिकित्सा अधिक प्रासंगिक हो गई है।
  • आयुष दवाएँ सुरक्षित, लागत-प्रभावी और दीर्घकालिक रोग प्रबंधन में सहायक हैं।

आयुष मंत्रालय (MOA): एक परिचय

  • आयुष मंत्रालय की स्थापना 9 नवंबर 2014 को पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के पुनरुत्थान और विकास हेतु की गई। 
  • इससे पहले, 1995 में भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी विभाग (ISM&H) बनाया गया था, जिसे 2003 में आयुष विभाग के रूप में नामित किया गया।

मुख्य उद्देश्य:

  • आयुष प्रणालियों के शैक्षिक मानकों में सुधार।
  • अनुसंधान संस्थानों को सशक्त बनाना और समयबद्ध अनुसंधान सुनिश्चित करना।
  • औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देना।
  • आयुष दवाओं के फार्माकोपियल मानकों का विकास।

प्रश्न  - आयुष मंत्रालय की स्थापना कब की गई ?

(a) वर्ष 2010 

(b) वर्ष 2012

(c) वर्ष 2014

(d) वर्ष 2018

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR