एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 805.91 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं ।
एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम
शुरुआत – वर्ष 2018
एनीमिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल।
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों और किशोरों में एनीमिया को कम करने पर ध्यान केंद्रित।
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से निपटने के लिए फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS), प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (PM POSHAN) और एकीकृत बाल विकास सेवाओं (ICDS) के माध्यम से की जा रही है।
एनीमिया मुक्त भारत (AMB) रणनीति के 6 प्रमुख घटक
(1) आयरन और फोलिक एसिड अनुपूरण (IFA Supplementation)
6-59 महीने के बच्चों को आईएफए सिरप (दो बार) दिया जाता है।
5-9 साल के बच्चों को आईएफए गुलाबी गोलियां, 10-19 साल के किशोरों को नीली गोलियां।
प्रजनन आयु की महिलाओं को साप्ताहिक रूप से लाल गोलियां।
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 180 दिनों तक प्रतिदिन आईएफए लाल गोलियां।
(2) कृमि मुक्ति अभियान (Deworming Initiative)
गर्भवती महिलाओं को दूसरी तिमाही में एल्बेंडाजोल की गोली दी जाती है।
सभी बच्चों को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर एल्बेंडाजोल की गोलियां दी जाती हैं।
(3) व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान (Behavior Change Communication)
स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान।
(4) एनीमिया की जांच और उपचार (Anemia Screening & Management Protocol)
एनीमिया के शीघ्र पहचान और इलाज के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच।
(5) आईएफए युक्त खाद्य पदार्थों का प्रावधान (Mandatory IFA Fortified Foods)
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), मिड-डे मील और आंगनवाड़ी सेवाओं में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना।
(6) एनीमिया के गैर-पोषणीय कारणों का समाधान (Addressing Non-Nutritional Causes)
मलेरिया, फ्लोरोसिस और हीमोग्लोबिनोपैथी जैसी बीमारियों के रोकथाम हेतु उपाय।
एनीमिया :-
एनीमिया एक रक्त विकार है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है|
इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और व्यक्ति कमज़ोर और थका हुआ महसूस करता है
प्रश्न - एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई थी ?