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कर्नाटक सरकार द्वारा कृषि कानून संशोधन वापस लेने के लिए विधेयक 

प्रारंभिक परीक्षा  कृषि कानून
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3

चर्चा में क्यों 

कर्नाटक  सरकार ने पिछली सरकार द्वारा कृषि उपज विपणन कानून में किए गए संशोधन को रद्द करने के लिए  विधानसभा में एक विधेयक पेश किया है,यह विधेयक कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के बाजारों के बाहर कृषि उत्पादों की बिक्री की अनुमति देता है।

विधेयक में संशोधन की आवश्यकता 

  • 2021 में, किसानों के विरोध के बाद, केंद्र  सरकार ने अपना ही संशोधन वापस ले लिया, जिसने एपीएमसी के बाहर उपज की बिक्री की अनुमति दी थी।
  • बजट भाषण में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री  ने कहा कि एपीएमसी अधिनियम में संशोधन राज्य में एपीएमसी बाजारों के पतन के कारणों में से एक था।
  • एपीएमसी अधिनियम में संशोधन करके, पिछली सरकार ने स्वस्थ विपणन नेटवर्क को कमजोर कर दिया और लाखों किसानों के जीवन में अनिश्चितता पैदा कर दी, जो अपनी आजीविका के लिए एपीएमसी पर निर्भर थे।
  • एपीएमसी अधिनियम में संशोधन से पहले, 2018-19 में राज्य के 167 एपीएमसी की कुल आय 570 करोड़ रुपये से 600 करोड़ रुपये के बीच थी, जो अधिनियम में संशोधन के बाद 2022-23 में भारी गिरावट के साथ 193 करोड़ रुपये हो गई है।
  • इसके अलावा, निजी कंपनियों द्वारा खुले बाजार में किसानों को धोखा देने और उनका शोषण करने के कई उदाहरण हमारे सामने हैं।
  • सरकार ने कहा कि किसानों के लिए कीमतें और आय बढ़ाने की पिछली राज्य सरकार की उम्मीदें विपणन कानूनों में बदलाव के माध्यम से पूरी नहीं हुई हैं।
  • हाल ही में कर्नाटक मंत्रिमंडल ने विपक्षी दलों की आपत्तियों  के बावजूद  एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी जो कृषि उपज विपणन समिति (APMC) कानून में संशोधन करेगा। इससे बाजार तक किसानों की पहुँच की सुविधा में सुधार होगा।
  • संशोधन का कदम किसानों के हितों की रक्षा  के लिए किया गया है, जिससे वह कर्ज के बोझ में न फंसे और बिचौलियों के हस्तक्षेप को कम किया जा सके।
  • कृषि विपणन का अर्थ उन समस्त क्रियाओं से है, जिनके माध्यम से  कृषि उपज को उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाता है जिसमें संग्रहण एवं भण्डारण (Preservation and Storage),परिष्करण(Processing), श्रेणीकरण तथा प्रमाणीकरण (Grading and Standardisation), एकत्रीकरण (Collection) शामिल  हैं।

संशोधन के बिंदु 

  • सरकार द्वारा प्रस्तावित नया विधेयक अनिवार्य रूप से कर्नाटक कृषि उपज विपणन (विनियमन और विकास) अधिनियम, 1966 में एक प्रमुख खंड को बहाल करता है, जिसे 2020 में संशोधन के माध्यम से हटा दिया गया था।
  • इस विधेयक के अनुसार अब कृषक अपनी उपज को कहीं भी बेचनें के लिए स्वतंत्र है जैसे- बाजार उप-यार्ड, उप-बाजार यार्ड, निजी बाजार यार्ड या किसान-उपभोक्ता बाजार यार्ड।
  • पुराने कानून में एपीएमसी बाजारों के बाहर अधिसूचित कृषि उपज की खरीद या बिक्री के लिए तीन महीने की कैद और 30,000 रुपये तक के जुर्माने की सजा का भी प्रावधान था।
  • 1966 के कानून को वापस करने के लिए आपत्तियाँ यह भी थी कि 2020 में संशोधन के कारण व्यापारियों द्वारा किसानों का शोषण हुआ क्योंकि इसे नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक तंत्र नहीं है और एपीएमसी बाजारों के बाहर बिक्री की सुविधा से सरकार का राजस्व प्रभावित हुआ है।

कृषि उपज विपणन (विनियमन और विकास) अधिनियम

  • कृषि उपज बाज़ार समिति (एपीएमसी) भारत में राज्य सरकारों द्वारा स्थापित एक विपणन बोर्ड है , जो यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को बड़े खुदरा विक्रेताओं द्वारा शोषण से बचाया जाएसाथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि खेत से खुदरा मूल्य का प्रसार अत्यधिक उच्च स्तर तक न पहुंचे।
  • एपीएमसी को राज्यों द्वारा कृषि उपज विपणन विनियमन (एपीएमआर) अधिनियम को अपनाने के माध्यम से विनियमित किया जाता है ।
  • 1947 में स्वतंत्रता से पहले, कृषि विपणन से संबंधित सरकारी नीति की प्रमुख चिंता उपभोक्ताओं के लिए भोजन और उद्योग के लिए कृषि-कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रण में रखना था। 
  • हालाँकि, स्वतंत्रता के बाद, किसानों के हितों की रक्षा करने और कृषि वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहन मूल्य प्रदान करने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • स्थानीय साहूकारों द्वारा किसानों से ब्याज के रूप में औने-पौने दाम पर भारी मात्रा में खाद्यान्न वसूलने की समस्याएँ पूरे देश में आम थीं।
  • किसानों द्वारा सामना की जाने वाली कमियों को पहचानना जैसे कि अनुचित कीमतों, विपणन की उच्च लागत के मामले में नुकसान और कृषि विपणन प्रणाली में उपज का काफी भौतिक नुकसान यद्यपि  भारत सरकार के द्वारा इनके समाधान हेतु कई नियम पेश किये गए। 
  • प्राथमिक कृषि उपज बाजारों के विनियमन और विकास को एक संस्थागत नवाचार के रूप में लिया गया था, और प्राथमिक थोक बाजारों को विनियमित करने के लिए अच्छी तरह से तैयार बाजार के निर्माण को एक आवश्यक आवश्यकता माना गया था।
  • सभी खाद्य उपज को बाज़ार में लाया जाना चाहिए और बिक्री नीलामी के माध्यम से की जानी चाहिए। 
  • राज्यों के अंदर विभिन्न स्थानों पर मार्केट प्लेस यानी मंडी स्थापित की जाती है।
  • व्यापारियों को बाज़ार के भीतर काम करने के लिए लाइसेंस जारी किए जाते हैं। मॉल मालिकों, थोक व्यापारियों, खुदरा व्यापारियों को किसानों से सीधे उपज खरीदने की अनुमति नहीं दी गई।

कृषि उपज बाज़ार समिति (एपीएमसी)

  • कृषि उपज बाज़ार समिति (एपीएमसी) राज्य सरकार के अधीन संचालित एक प्रणाली है। कृषि विपणन एक राज्य का विषय है।
  • एपीएमसी के पास बाजार क्षेत्र में यार्ड/मंडियां हैं जो अधिसूचित कृषि उपज और पशुधन को नियंत्रित करती हैं। 
  • एपीएमसी की शुरूआत लेनदारों और अन्य मध्यस्थों के दबाव और शोषण के तहत किसानों द्वारा संकटकालीन बिक्री की घटना को सीमित करने के लिए की गयी थी।
  • एपीएमसी किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करता है।
  • एपीएमसी कृषि बाजार के विनियमन के लिए भी जिम्मेदार है।

प्रश्न : निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 

  1. कृषि उपज बाज़ार समिति (एपीएमसी) भारत में राज्य सरकारों द्वारा स्थापित एक विपणन बोर्ड है।
  2. कृषि विपणन का अर्थ उन समस्त क्रियाओं से है, जिनके माध्यम से  कृषि उपज को उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाता है।
  3. एपीएमसी एक्ट के तहत व्यापारियों को बाज़ार के भीतर काम करने के लिए लाइसेंस जारी किए जाते हैं। 

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

(a) केवल एक 

(b) केवल दो 

(c) सभी तीनों 

(d) कोई भी नहीं 

उत्तर : (c)

मुख्य परीक्षा प्रश्न: कृषि उपज विपणन (विनियमन और विकास) अधिनियम क्या है ?इससे जुडी प्रमुख चिंताओं का वर्णन कीजिए साथ ही सुझाव भी दीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

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