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चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus - CHPV)

CHANDIPURA_VIRUS

  • चांदीपुरा वायरस (CHPV) एक RNA वायरस है, जो Rhabdoviridae परिवार से संबंधित है।
  • यह मुख्य रूप से एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome - AES) के प्रकोप के लिए जाना जाता है, खासकर पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी भारत में।
  • यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

संक्रमण का प्रसार (Transmission)

  • चांदीपुरा वायरस वेक्टर (Vector - वह जीव जो वायरस फैलाता है) के माध्यम से फैलता है, जिनमें शामिल हैं:
    • सैंड-फ्लाई (Sand-flies - Phlebotomus species)मुख्य वाहक (Primary carrier)
    • मच्छर (Mosquitoes)
    • किलनी (Ticks)

ये वेक्टर वायरस को मानव शरीर में पहुंचाकर संक्रमण फैलाते हैं।

लक्षण (Symptoms)

  • एक बार संक्रमित होने के बाद, यह वायरस मस्तिष्क (Brain) को प्रभावित करता है और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) पैदा कर सकता है
  • प्रारंभिक लक्षण (Early Symptoms):
    • तेज बुखार (High fever)
    • सिरदर्द (Headache)
    • उल्टी और मतली (Vomiting and nausea)
    • डायरिया (Diarrhoea - दस्त)
  • गंभीर लक्षण (Severe Symptoms):
    • चेतना खोना (Loss of consciousness)
    • दौरे पड़ना (Seizures - झटके आना)
    • न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं (Neurological complications - जैसे भ्रम, सुस्ती)
    • कोमा (Coma) और मृत्यु (Death - गंभीर मामलों में)

चांदीपुरा वायरस का उपचार और रोकथाम (Treatment & Prevention of Chandipura Virus)

उपचार (Treatment):

  • कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा (Antiviral drug) उपलब्ध नहीं है।
  • कोई प्रभावी वैक्सीन (Effective vaccine) भी मौजूद नहीं है।
  • इलाज मुख्य रूप से लक्षणों के प्रबंधन (Symptom management) पर केंद्रित होता है, जिसमें शामिल हैं:
    • बुखार कम करने के लिए एंटीपायरेटिक्स (Antipyretics - बुखार कम करने वाली दवाएं)
    • दौरे रोकने के लिए एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं (Anti-epileptic drugs - मिर्गी या झटकों को रोकने वाली दवाएं)
    • शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए अंतःशिरा (IV) तरल पदार्थ (Intravenous fluids - ड्रिप के माध्यम से तरल आपूर्ति)

रोकथाम (Prevention):

  • चूंकि इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन या प्रभावी उपचार नहीं है, इसलिए रोकथाम (Prevention) ही सबसे अच्छा उपाय है।
  • सैंड-फ्लाई और मच्छरों से सुरक्षा (Protection from Sand-flies & Mosquitoes):
    • कीटनाशकों (Insecticides - Pesticide Sprays) का उपयोग करें।
    • मच्छरदानी (Mosquito nets) लगा कर सोएं
    • पूरी बाजू के कपड़े (Fully covered clothing) पहनें।
  • स्वच्छता और साफ-सफाई बनाए रखें (Maintain Hygiene & Cleanliness):
    • अपने आसपास सफाई रखें ताकि मच्छर और सैंड-फ्लाई पनप न सकें।
    • रुके हुए पानी (Stagnant water) को हटाएं, जिससे मच्छरों का प्रजनन न हो।
  • शुरुआती पहचान और उपचार (Early Detection & Treatment):
    • यदि किसी को अचानक तेज़ बुखार, उल्टी, सिरदर्द या न्यूरोलॉजिकल लक्षण (Neurological symptoms) दिखें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता (Medical help) लें।

भारत में चांदीपुरा वायरस के प्रकोप (Outbreaks in India)

  • चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) की पहचान सबसे पहले 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी, इसी के नाम पर इसका नाम रखा गया।
  • तब से यह वायरस गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कई बार प्रकोप (Outbreaks) का कारण बन चुका है।
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