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राष्ट्रीय आपदा घोषित करने संबंधी मांग

मुख्य परीक्षा

(सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : आपदा और आपदा प्रबंधन)

संदर्भ

केंद्र सरकार से वायनाड भूस्खलन को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की जा रही है। इससे पहले भी केरल में आई बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई थी। 

आपदा की परिभाषा 

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार, ‘आपदा’का अर्थ किसी भी क्षेत्र में होने वाली तबाही, दुर्घटना, विपत्ति या गंभीर घटना है जो प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों से या दुर्घटना या लापरवाही से उत्पन्न हो सकती है।
  • इसके परिणाम स्वरुप निम्नलिखित स्थितियां हो सकती है : 
    • जीवन की भारी हानि या मानवीय पीड़ा (या)
    • संपत्ति को नुकसान और विनाश (या)
    • पर्यावरण को नुकसान या गिरावट
  • किसी दुर्घटना को आपदा मानने के लिए उसे ऐसी प्रकृति या परिमाण का होना चाहिए जिसका सामना करने की क्षमता प्रभावित क्षेत्र के समुदाय से परे हो।
  • इसके अनुसार, प्राकृतिक आपदा में भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात, सुनामी, शहरी बाढ़, हीटवेव आदि शामिल हो सकती हैं। इसके आलावा परमाणु, जैविक एवं रासायनिक प्रकृति की मानव निर्मित आपदा भी इसमें शामिल हो सकती है।

राष्ट्रीय आपदा 

  • वर्तमान में किसी प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए कोई भी कार्यकारी या कानूनी प्रावधान नहीं है।
    • इसलिए किसी भी आपदा को राष्ट्रीय आपदा के रूप में परिभाषित करने के लिए कोई निश्चित मानदंड नहीं है।
  • हालाँकि, वर्ष 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय समिति को राष्ट्रीय आपदा को परिभाषित करने वाले मापदंडों पर विचार करने का कार्य सौंपा गया था किंतु समिति ने कोई निश्चित मानदंड नहीं सुझाया। 

आपदाओं के वर्गीकरण का वर्तमान आधार 

  • 10वें वित्त आयोग (1995-2000) के सुझाव के अनुसार, यदि कोई आपदा किसी राज्य की एक तिहाई आबादी को प्रभावित करती है तो उसे ‘दुर्लभतम गंभीरता की राष्ट्रीय आपदा’ कहा जाना चाहिए।
    • हालाँकि, पैनल ने ‘दुर्लभतम गंभीरता की आपदा’ को परिभाषित नहीं किया है।  
  • दुर्लभतम गंभीरता की आपदा को वस्तुत: मामला-दर-मामला के आधार पर तय किया जाना चाहिए, जिसमें निम्न बिंदुओं पर विचार किया जा सकता है : 
    • आपदा की तीव्रता और परिमाण 
    • आवश्यक सहायता का स्तर
    • समस्या से निपटने के लिए राज्य की क्षमता 
    • सहायता एवं राहत प्रदान करने के उपलब्ध विकल्प 
    • लचीलापन 
  • उदाहरण के लिए उत्तराखंड में अचानक आई बाढ़ और चक्रवात हुदहुद को बाद में ‘गंभीर प्रकृति’ की आपदाओं के रूप में वर्गीकृत किया गया।

‘दुर्लभ आपदा’ घोषित करने के निहितार्थ 

  • जब किसी आपदा को ‘दुर्लभ गंभीरता’ या ’गंभीर प्रकृति’ की घोषित किया जाता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर राज्य सरकार को सहायता प्रदान की जाती है। 
  • केंद्र ‘राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष’ से अतिरिक्त सहायता पर भी विचार करता है। 
  • एक आपदा राहत कोष (CRF) स्थापित किया जाता है, जिसमें केंद्र व राज्य के बीच 3:1 का कोष साझा किया जाता है। 
  • जब सी.आर.एफ. में संसाधन अपर्याप्त होते हैं, तो राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता निधि (NCCF) से अतिरिक्त सहायता पर विचार किया जाता है, जिसे केंद्र द्वारा 100% वित्त पोषित किया जाता है। 
  • एक बार जब आपदा को ‘गंभीर’ घोषित कर दिया जाता है, तो प्रभावित व्यक्तियों को ऋण की अदायगी में राहत या रियायती शर्तों पर नए ऋण देने पर भी विचार किया जाता है।

आगे की राह 

आपदाओं के वर्गीकरण के संदर्भ में आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन के माध्यम से एक निश्चित ढांचा तैयार किया जाना चाहिए जिससे केंद्र और राज्यों के मध्य आपसी सहयोग से आपदा प्रबंधन में शीघ्रता लायी जा सके।

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