चर्चा में क्यों?
हाल ही में यूनेस्को ने "शिक्षा और पोषणः अच्छा खाना सीखें" शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- 27-28 मार्च 2024, फ्रांस में पोषण विकास शिखर सम्मेलन में जारी।
- सरकारों को स्कूली भोजन की पहुंच और पोषण गुणवत्ता सुधारने का आह्वान।
- वैश्विक स्तर पर प्राथमिक विद्यालय के 50% छात्रों को स्कूली भोजन मिला।
- 27% स्कूली भोजन पोषण विशेषज्ञों की सलाह के बिना तैयार।
- 187 देशों में से सिर्फ 93 के पास स्कूली भोजन पर कोई कानून/मार्गदर्शन।
- कैफेटेरिया और वेंडिंग मशीन के खाद्य पदार्थों पर नियम और भी कम देशों में।
स्कूली भोजन के लाभ:
- नामांकन दर में 9% वृद्धि।
- उपस्थिति दर में 8% वृद्धि।
- सीखने की क्षमता में सुधार।
- भारत का उदाहरण: महाराष्ट्र में फोर्टिफाइड जैविक मोती बाजरा से किशोरों की स्मरण शक्ति और ध्यान अवधि में सुधार।
यूनेस्को की सिफारिशें:
- ताजा, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग की वकालत।
- स्कूली पाठ्यक्रम में खाद्य शिक्षा शामिल करने की सिफारिश।
भविष्य की योजना (2025):
- सरकारों और शिक्षाविदों के लिए स्वास्थ्य और पोषण पर सहायता उपकरण विकसित करेगा।
- इसमें व्यावहारिक मार्गदर्शिका और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल होगा।
प्रश्न: यूनेस्को की रिपोर्ट किस अवसर पर जारी की गई?
(a) संयुक्त राष्ट्र महासभा सम्मेलन
(b) विश्व खाद्य शिखर सम्मेलन
(c) पोषण विकास शिखर सम्मेलन
(d) जी-20 शिक्षा सम्मेलन
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