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फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (Fixed Dose Combination - FDC) दवाएं

FIXED_DOSE_COMBINATION_PRODUCTS

FDC क्या हैं?

  • फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाएं वे फार्मास्युटिकल उत्पाद (Pharmaceutical Products) होती हैं, जिनमें दो या अधिक सक्रिय घटक (Active Ingredients) एक निश्चित अनुपात (Fixed Ratio) में मौजूद होते हैं।
  • इन्हें "कॉकटेल ड्रग्स (Cocktail Drugs)" भी कहा जाता है, क्योंकि इन्हें विशेष बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है।
  • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 (Drugs and Cosmetics Rules, 1945) के अनुसार, FDC को "नई दवा (New Drug)" माना जाता है और इनकी मंजूरी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO - Central Drugs Standard Control Organization) द्वारा दी जाती है।

FDC के उपयोग के पीछे तर्क (Rationale for Using FDCs)

FDC दवाएं कई लाभ प्रदान करती हैं, जैसे:-

  • बढ़ी हुई प्रभावशीलता (Enhanced Efficacy): सक्रिय घटकों (Active Ingredients) का संयोजन दवा को अधिक प्रभावी बना सकता है।
  • कम टैबलेट बोझ (Reduced Pill Burden): रोगियों को अलग-अलग दवाएं लेने के बजाय एक ही संयोजन वाली गोली दी जाती है।
  • अधिक किफायती (More Cost-Effective): अलग-अलग दवाएं खरीदने की तुलना में FDC दवाएं सस्ती होती हैं।
  • बेहतर फार्माकोकाइनेटिक लाभ (Better Pharmacokinetic Benefits): शरीर में दवा के अवशोषण (Absorption), वितरण (Distribution), चयापचय (Metabolism) और उत्सर्जन (Excretion) में सुधार हो सकता है।

FDC के उदाहरण (Examples of FDCs)

  • सर्दी, खांसी और बुखार की दवाएं (Cough, Cold & Fever Medications)(Paracetamol + Phenylephrine + Caffeine)
  • एंटीबायोटिक संयोजन (Antibiotic Combinations)(Amoxicillin + Clavulanic Acid)
  • मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स (Multivitamin and Mineral Supplements)

फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) से जुड़ी संभावित समस्याएं

FDC से होने वाली समस्याएं (Potential Issues with FDCs)

  • खुराक में लचीलापन नहीं (Lack of Dosage Flexibility):
  • फिक्स्ड अनुपात (Fixed Ratio) सभी रोगियों की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होता।
  • हर व्यक्ति की बीमारी की गंभीरता अलग होती है, लेकिन FDC में खुराक तय होती है, जिससे समस्या हो सकती है।
  • अनुमोदन रहित और प्रतिबंधित FDC की आसान उपलब्धता (Easy Availability of Unapproved and Banned FDCs):
  • कई FDC बिना वैज्ञानिक परीक्षण (Scientific Validation) के बेचे जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
  • कुछ दवाएं प्रतिबंधित होने के बावजूद बाजार में उपलब्ध रहती हैं।
  • एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR - Antimicrobial Resistance) का खतरा (Increased Risk of AMR):
  • एंटीबायोटिक (Antibiotic) FDC का अत्यधिक उपयोग दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया (Drug-Resistant Bacteria) उत्पन्न कर सकता है, जिससे सामान्य संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता है।

भारत में दवा नियमन (Regulation of Drugs in India)

भारत में विभिन्न नियामक संस्थाएं (Regulatory Bodies in India)

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO - Central Drugs Standard Control Organization):-

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के तहत प्रमुख नियामक प्राधिकरण (Primary Regulatory Authority)।
  • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 (Drugs and Cosmetics Rules, 1945) के तहत दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और कॉस्मेटिक्स को नियंत्रित करता है।

राज्य औषधि नियामक प्राधिकरण (SDRA - State Drug Regulatory Authorities)

  • राज्य स्तर पर दवा निर्माण और बिक्री की निगरानी करता है।
  • नकली दवाओं (Counterfeit Drugs) की बिक्री पर नजर रखता है।

औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB - Drug Technical Advisory Board) और औषधि परामर्शदात्री समिति (DCC - Drug Consultative Committee)

  • CDSCO को वैज्ञानिक और तकनीकी परामर्श (Scientific and Technical Advice) प्रदान करते हैं।
  • दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता (Efficacy) सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाते हैं।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA - National Pharmaceutical Pricing Authority)

  • स्थापना (Established): 1997 में भारत में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित (Regulate Drug Prices) करने के लिए बनाया गया।
  • मंत्रालय (Ministry): रसायन और उर्वरक मंत्रालय (Ministry of Chemicals and Fertilizers) के फार्मास्यूटिकल्स विभाग (Department of Pharmaceuticals) के तहत कार्य करता है।
  • NPPA की भूमिका (Role of NPPA)
  • आवश्यक दवाओं की कीमतें नियंत्रित और संशोधित करना (Controls and Revises the Prices of Essential Medicines)।
  • औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (Drug Price Control Order, 2013) को लागू करना (Implements the Drug (Price Control) Order, 2013)।
  • बाजार में दवाओं की कीमतों की निगरानी करना (Monitors Drug Prices in the Market)।
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