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इंटरनेट शटडाउन रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा : समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि; सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती) 

संदर्भ 

डिजिटल अधिकार संगठन एक्सेस नाउ (Access Now) ने वैश्विक स्तर पर इंटरनेट शट डाउन पर रिपोर्ट जारी की है। 

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष 

इंटरनेट शटडाउन की वैश्विक स्थिति 

  • पिछले वर्ष 54 देशों में 296 से अधिक सरकारी स्तर पर इंटरनेट शटडाउन हुए, जिनमें से 202 एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 11 देशों में दर्ज किए गए। 
    • भारत में कुल 84 बार इंटरनेट बंद हुआ। ऐसे में इंटरनेट शटडाउन के मामले में भारत का हिस्सा 28% था।
  • भारत सहित 11 देशों में 103 से ज़्यादा संघर्ष जन्य शटडाउन हुए हैं। इस रिपोर्ट में विरोध एवं अस्थिरता, परीक्षा, चुनाव व गंभीर मानवाधिकार हनन को छिपाने के लिए शटडाउन को अन्य ट्रिगर के रूप में देखा गया है।
  • वर्ष 2024 में सबसे अधिक इंटरनेट शटडाउन वाले शीर्ष 10 देश- म्यांमार (85) > भारत (84) > पाकिस्तान (21) > रूस > यूक्रेन > फिलिस्तीन > बांग्लादेश > इराक > जॉर्डन > सूडान

भारत की स्थिति 

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पिछले वर्ष इंटरनेट एक्सेस पर 84 बार रोक लगाई गयी, जोकि वर्ष 2023 की तुलना में कम है। हालांकि, यह किसी भी लोकतांत्रिक देश में अभी भी सर्वाधिक है।
    • विगत छह वर्षों में पहली बार भारत सर्वाधिक बार इंटरनेट बंद करने वाले देशों में शीर्ष पर नहीं है। 
  • रिपोर्ट के अनुसार, 84 बार शटडाउन में से 41 विरोध प्रदर्शनों से संबंधित थे, जबकि शटडाउन 23 सांप्रदायिक हिंसा के कारण हुए थे। 
    • इसके अलावा पिछले वर्ष सरकारी नौकरी की परीक्षाओं के दौरान पांच बार इंटरनेट शटडाउन किया गया था।

राज्यवार आँकड़े 

  • रिपोर्ट के अनुसार 16 से अधिक भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कम-से-कम एक बार इंटरनेट बंद किया गया। 
  • इंटरनेट शटडाउन के मामले में शीर्ष राज्य- मणिपुर (21) > हरियाणा > जम्मू एवं कश्मीर 

इंटरनेट शटडाउन के बारे में 

  • इंटरनेट शटडाउन सरकार द्वारा किसी विशेष आबादी के लिए या किसी स्थान के भीतर किसी भी समयावधि के लिए ऑनलाइन संचार को प्रतिबंधित करने के लिए लागू किया जाता है। 
  • विनियमन : वर्तमान में दूरसंचार सेवाओं का निलंबन (इंटरनेट शटडाउन सहित) भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के तहत अधिसूचित दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन (सार्वजनिक आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा) नियम, 2017 द्वारा शासित है।
    • यह सार्वजनिक आपातकाल के आधार पर किसी क्षेत्र में दूरसंचार सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का प्रावधान करता है (एक बार में 15 दिनों तक)
    • यह अधिनियम केंद्र सरकार को इंटरनेट सेवाओं सहित विभिन्न प्रकार की दूरसंचार सेवाओं को विनियमित करने और उनके लिए लाइसेंस देने का अधिकार देता है।
    • दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन के आदेश केवल संघ/राज्य के गृह सचिव द्वारा जारी किए जाते हैं। 
    • 2017 के नियमों के तहत केंद्रीय स्तर पर कैबिनेट सचिव और राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समीक्षा समिति क्रमशः केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा दूरसंचार/इंटरनेट बंद करने के आदेशों की समीक्षा करती है।

इंटरनेट शटडाउन का कारण 

  • सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए 
  • गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए 
  • विरोध प्रदर्शन के समय सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और अफवाह आदि को रोकने के लिए  
  • परीक्षा में सुरक्षा व शुचिता बनाए रखने के लिए  
  • सांप्रदायिक हिंसा के दौरान संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए 

इंटरनेट शटडाउन का प्रभाव

  • आर्थिक प्रभाव : इंटरनेट शटडाउन के कारण व्यावसायिक गतिविधि में व्यवधान, निवेश में समस्या एवं ऑनलाइन बैंकिंग व ई-कॉमर्स जैसी आवश्यक सेवाओं में व्यवधान हो सकता है जो अंततः देश के सकल घरेलू उत्पाद को प्रभावित करता है।
    • एक रिपोर्ट के अनुसार, शटडाउन के कारण अकेले भारत में जनवरी-जून 2023 तक 118 मिलियन डॉलर के विदेशी निवेश का नुकसान हुआ है।
  • आवश्यक सेवाओं में व्यवधान : इंटरनेट शटडाउन से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं तक पहुंच बाधित हो सकती है।
  • मौलिक अधिकार : इंटरनेट शटडाउन सूचना तक पहुँच को प्रभावित करता है जो यह डिजिटल स्वतंत्रता एवं मौलिक मानवाधिकारों (जैसे- वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : अनुच्छेद 19) आदि को बाधित करता है।
  • आपदा प्रबंधन : इंटरनेट शटडाउन के कारण संचार में बाधा से प्रारंभिक चेतावनी एवं निकासी मार्गों के संबंध में सूचना के प्रसार में बाधा आती है जिससे आपदाओं का प्रभाव बढ़ जाता है।
  • मानवाधिकारों का हनन : शटडाउन जवाबदेही में बाधा डालता है जहाँ हमलावर अपने अपराधों (जैसे- हत्या, आगजनी, लिंग आधारित हिंसा आदि) को छिपाने के लिए व्यवधान का उपयोग करते हैं।

इंटरनेट शटडाउन पर सर्वोच्च न्यायालय का मत

  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इंटरनेट के माध्यम से किसी भी पेशे का अभ्यास करने या किसी भी व्यापार, व्यवसाय या व्यवसाय संचालन की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।
  • इसके अलावा, न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इंटरनेट के मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध संविधान के प्रावधानों के अनुसार लगाया जाना चाहिए और इस तरह के किसी भी प्रतिबंध का आनुपातिक तर्क होना चाहिए। 
  • न्यायालय ने माना कि इंटरनेट शटडाउन को केवल बाहरी परिस्थितियों में ही अधिकृत किया जा सकता है।
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