(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: शासन व्यवस्था; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय) |
संदर्भ
केरल विधानसभा द्वारा ‘केरल राज्य वरिष्ठ नागरिक आयोग विधेयक, 2025’ पारित किया गया।
केरल वरिष्ठ नागरिक आयोग के बारे में
- परिचय : यह केरल राज्य वरिष्ठ नागरिक आयोग अधिनियम, 2025 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
- केरल वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष आयोग बनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
- उद्देश्य : वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करना।
- आयोग की संरचना : आयोग में कुल चार सदस्य (एक अध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य) होंगे, जो सभी वरिष्ठ नागरिक होंगे।
- आयोग के अध्यक्ष का दर्जा राज्य सरकार में सचिव के बराबर होगा।
- समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए एक सदस्य अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा एक महिला सदस्य होंगी।
- कार्यकाल : अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।
आयोग की शक्तियां
- आयोग एक स्वतंत्र निकाय के रूप में कार्य करेगा, जिसके पास सिविल न्यायालय के समान शक्तियों सहित महत्वपूर्ण अधिकार होंगे।
- आयोग के पास वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों में स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति निहित की गई है।
- इसमें शिकायतों की जांच करने और सुरक्षात्मक उपाय लागू करने की क्षमता होगी।
आयोग के कार्य
- वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य सेवा के संदर्भ में नियमित चिकित्सा जांच, किफायती स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच सुनिश्चित करना
- वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियों से निपटने और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए वृद्धावस्था देखभाल की सुविधाएं प्रदान करना
- अकेलेपन एवं अवसाद जैसी समस्याओं के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को प्राथमिकता देना
- राज्य की बुजुर्ग आबादी के कल्याण, संरक्षण और पुनर्वास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना
- वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराना
- सामुदायिक विकास में वरिष्ठ नागरिकों के कौशल को शामिल करने के उपाय लागू करना
- वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के संबंध में कार्रवाई और समाधान के लिए राज्य सरकार को सिफारिश करना
- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना
इसे भी जानिए!
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, केरल राज्य की आबादी में बुजुर्गों की संख्या 12.6% थी।
- हालांकि, 2018 के आंकड़ों के अनुसार यह बढ़कर 23% हो गई है।
- वर्ष 2030 तक, राज्य की आबादी में बुजुर्गों की संख्या बढ़कर 25% होने की उम्मीद है।
- वरिष्ठ नागरिकों पर राष्ट्रीय नीति, 2011 में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इसी प्रकार के आयोग बनाने की सिफारिश की गई थी।
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