चर्चा में क्यों
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कोच राजबोंगशी समुदाय के खिलाफ विदेशी न्यायाधिकरण में लंबित 28,000 मामलों को वापस लेने की घोषणा की है।
कोच राजबोंगशी समुदाय के बारे में
- परिचय : यह पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य का एक स्थानीय समुदाय है जो असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, मेघालय, नेपाल, बांग्लादेश व भूटान में बसा हुआ है।
- इन्हें वर्तमान असम में ‘कोच राजबोंगशी’, पश्चिम बंगाल में ‘राजबोंगशी’, मेघालय में ‘कोच’ और नेपाल में ‘राजबंशी’ के नाम से जाना जाता है।
- मूल निवास : यह मूल रूप से ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी के निचले भाग के निवासी हैं।
- ऐतिहासिक जड़ें : इस समुदाय के लोग अपनी जड़ें कामतापुर साम्राज्य (650 ई. से 1494 ई.) से जोड़ते हैं।
- यह साम्राज्य वर्तमान असम, पश्चिम बंगाल, नेपाल और बांग्लादेश के कुछ हिस्से में विस्तृत था।
- आबादी : असम में लगभग 25 लाख कोच राजबोंगशी हैं जो निचले असम, गोलाघाट, कालियाबोर, बरहामपुर, मोरीगांव, जोनाई और लखीमपुर में फैले हुए हैं।
- भाषाएँ : राजबोंगशी भाषा एवं कोच भाषा
- आजीविका : प्राथमिक आजीविका स्रोत कृषि है और वे प्रकृति के बहुत करीब रहते हैं।
- राजनीतिक प्रभाव : यह समुदाय राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से कम से कम 25 सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग : यह समुदाय असम के उन छह समुदायों में से एक हैं जो अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांग रहे हैं।
- अन्य पाँच समुदाय : अहोम, चुटिया, मटक, आदिवासी (चाय जनजाति) व मोरन।
- 29 फरवरी 2016 को गृह मंत्रालय द्वारा इन छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की सिफारिश करने के लिए एक समिति गठित की गई थी।
हालिया मुद्दा
- असम मंत्रिमंडल ने कोच-राजबंशी समुदाय के खिलाफ विभिन्न विदेशी न्यायाधिकरणों में दर्ज लगभग 28,000 मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
- इस निर्णय से इन लोगों पर से 'डी' या संदिग्ध मतदाता का टैग प्रभावी रूप से हट जाएगा।
- 'डी' असम में मतदाताओं की एक श्रेणी है, जिन्हें सरकार ने विश्वसनीय नागरिकता दस्तावेजों की कमी के कारण मताधिकार से वंचित कर दिया है।
- इस निर्णय से यह समुदाय भारत के नागरिक के रूप में अपने अधिकार प्राप्त कर सकेंगे और आगामी विधान सभा चुनाव (2026) में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
- असम सरकार का मानना है कि कोच राजबोंगशी एक स्वदेशी समुदाय हैं और असम की संस्कृति का एक अनिवार्य अंग हैं।
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विदेशी न्यायाधिकरण (Foreign Tribunals) के बारे में
- असम में 100 विदेशी न्यायाधिकरण हैं, जिनकी स्थापना 1946 के विदेशी अधिनियम और 1964 के विदेशी (न्यायाधिकरण) आदेश के तहत अवैध अप्रवासी संदिग्ध व्यक्तियों की नागरिकता की स्थिति निर्धारित करने के लिए की गई थी।
- न्यायाधीशों/अधिवक्ताओं को इन न्यायाधिकरणों के सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है।
- असम राज्य में अभी तक विदेशी न्यायाधिकरणों ने 1,59,353 लोगों को विदेशी घोषित किया है।
- संबंधित एजेंसियों द्वारा 4,35,841 मामले इन न्यायाधिकरणों को भेजे गए थे, जिनमें से 3,37,186 का निपटारा कर दिया गया जबकि 96,149 मामले लंबित हैं।
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