(प्रारंभिक परीक्षा : समसामयिक घटनाक्रम, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन) |
संदर्भ
नेचर पत्रिका में गहरे समुद्र में खनन के दीर्घकालिक प्रभावों पर एक शोध अध्ययन प्रकाशित किया गया।
शोध अध्ययन के बारे में
- शीर्षक : ‘गहरे समुद्र में खनन पथ पर दीर्घकालिक प्रभाव एवं जैविक पुनरुद्धार’ (Long term impact and biological recovery in a deep-sea mining track)
- शोधकर्ता : यह अध्ययन ब्रिटेन के राष्ट्रीय समुद्री विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किया गया।
- शामिल क्षेत्र : अध्ययन में प्रशांत महासागर के समुद्री तल के एक हिस्से पर छोटे पैमाने के खनन निष्कर्षण के प्रभाव की जांच की गयी।
- प्रमुख निष्कर्ष
- वर्ष 1979 में किये गये खनन के कारण प्रशांत महासागर के तलछट में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।
- साथ ही, इस क्षेत्र में रहने वाले बड़े जलीय जीवों की आबादी में कमी आई है।
- खनन के 40 वर्ष से भी अधिक समय के बाद भी प्रभावित समुद्री तल का पुनरुद्धार नही हो पाया है।
शोध की प्रासंगिकता
- हाल ही में, जमैका के किंग्स्टन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण की परिषद की बैठक में 36 देशों ने भाग लिया, जिसमें इस बात पर चर्चा की गई कि क्या खनन कंपनियों को समुद्र तल से धातु निकालने की अनुमति दी जानी चाहिए।
- पिछले अन्य अध्ययनों में 200 मीटर से नीचे खनन से हानिकारक ध्वनि प्रदूषण, कंपन एवं प्रकाश प्रदूषण जैसे प्रभावों पर चिंता व्यक्त की गई है।
- करंट बायोलॉजी में प्रकाशित वर्ष 2023 के अध्ययन में पाया गया कि जहाँ भी गहरे समुद्र में खनन होता है वहां जानवरों की आबादी कम हो जाती है और यह पहले की तुलना में अधिक व्यापक पदचिह्न (Footprint) छोड़ता है।
गहरे समुद्र में खनन के बारे में
- क्या है : गहरे समुद्र में खनन, समुद्र तल से 200 मीटर से अधिक की गहराई पर पाए जाने वाले मूल्यवान धातुओं एवं दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण की प्रक्रिया है।
- प्रकार : गहरे समुद्र में खनन के तीन प्रकार होते हैं -
- समुद्र तल से पॉलिमेटैलिक नोड्यूल का निष्कर्षण
- समुद्र तल में बड़े पैमाने पर सल्फाइड भंडारों का खनन
- पानी के नीचे की चट्टनों से कोबाल्ट क्रस्ट को अलग करना
- आवश्यकता
- कोबाल्ट, तांबा, निकेल और मैगनीज जैसे खनिजों की बढ़ती मांग की आपूर्ति हेतु
- बैटरी, सौर पैनल और पवन टर्बाइन जैसी प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन देने के लिए
गहरे समुद्र में खनन के प्रभाव
हालांकि गहरे समुद्र में खनन अभी भी प्रायोगिक चरण में हैं और इससे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों पर अध्ययन भी कम हैं जो कि गहरे समुद्र में खनन के दीर्घकालिक प्रभाव पर शोध की आवश्यकता को भी दर्शाता है। लेकिन वैज्ञानिक लगातार खनन से उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय चिंताओं के संबंध में चेतावनी दे रहे हैं तथा उनका कहना है कि गहरे समुद्र पर होने वाला नुकसान संभवतः स्थायी होगा।
इससे पड़ने वाले संभावित प्रभाव निम्नलिखित हैं -
जलवायु पर प्रभाव
- गहरे समुद्र में खनन से जलवायु पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है चूंकि गहरे समुद्र में खनन एक उच्च ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वाला ऊर्जा गहन उद्योग है।
- ऐसे में यह कार्बन एवं अन्य ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ाकर जलवायु संकट को बढ़ा सकता है।
समुद्री जीवों का आवास विनाश एवं प्रजाति विलुप्ति
- खनन के दौरान उपयोग की जाने वाली भारी मशीनरी के उपयोग एवं अन्य गतिविधियों से समुद्री जीवों के आवासों को हानि पहुँचती है।
- आवास की क्षति एवं पारिस्थितिकी तंत्र के विघटन से गहरे समुद्र पर पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियों पर विलुप्ति का भी संकट बना हुआ है।
ध्वनि एवं प्रकाश प्रदूषण
- खनन जहाजों और उपकरणों द्वारा उत्पन्न शोर और प्रकाश गहरे समुद्र के प्राकृतिक, शांत और अंधेरे वातावरण को बाधित करते हैं।
- जो कि गहरे समुद्र में रहने वाले अनेक समुद्री स्तनधारियों एवं अन्य प्रजातियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं जो संचार और नेविगेशन के लिए ध्वनि और प्रकाश पर निर्भर हैं।
महासागरीय कार्बन चक्र पर प्रभाव
- गहरे समुद्र की तलछट में बड़ी मात्रा में कार्बन का जमाव होता है ऐसे में खनन गतिविधियां इन जमावों के रूप में संग्रहीत कार्बन को सतह तक लाकर कार्बन उत्सर्जन को बढ़ा सकती है।
- गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र सतह से समुद्र तल तक कार्बन परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ऐसे में खनन गतिविधियां महासागरों की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को बाधित कर सकती है जिससे कार्बन भंडारण क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है।