उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Diseases - NTDs) और भारत की प्रगति(Health)
उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTDs) एक समूह है जिसमें संक्रामक बीमारियाँ शामिल हैं, जो मुख्य रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को प्रभावित करती हैं, विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय (tropical) और उपोष्णकटिबंधीय (subtropical) क्षेत्रों में।
ये बीमारियाँ लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याएँ और सामाजिक-आर्थिक बोझ (socioeconomic burden) पैदा करती हैं, लेकिन इन्हें वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा (global health agenda) में बहुत कम प्राथमिकता दी जाती है।
NTDs की विशेषताएँ
मुख्य रूप से निम्न-आय (low-income) और अविकसित (underdeveloped) क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं।
दीर्घकालिक (chronic) स्वास्थ्य समस्याएँ और विकलांगता (disabilities) उत्पन्न करती हैं।
विभिन्न रोगजनकों (pathogens) जैसे वायरस (virus), बैक्टीरिया (bacteria), परजीवी (parasites), और फंगस (fungi) के कारण होती हैं।
सामाजिक कलंक (social stigma) और भेदभाव (discrimination) से जुड़ी होती हैं।
ये रोग रोकथाम योग्य (preventable) और उपचार योग्य (treatable) होते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं (healthcare services) और जागरूकता (awareness) की कमी के कारण इनका उन्मूलन (eradication) चुनौतीपूर्ण (challenging) बन जाता है।
भारत में प्रमुख उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Diseases - NTDs)
भारत 10 से अधिक प्रमुख NTDs का सबसे अधिक वैश्विक भार (global burden) वहन करता है।