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उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Diseases - NTDs) और भारत की प्रगति(Health)

  • उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTDs) एक समूह है जिसमें संक्रामक बीमारियाँ शामिल हैं, जो मुख्य रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को प्रभावित करती हैं, विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय (tropical) और उपोष्णकटिबंधीय (subtropical) क्षेत्रों में।
  • ये बीमारियाँ लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याएँ और सामाजिक-आर्थिक बोझ (socioeconomic burden) पैदा करती हैं, लेकिन इन्हें वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा (global health agenda) में बहुत कम प्राथमिकता दी जाती है।

NTDs की विशेषताएँ

  • मुख्य रूप से निम्न-आय (low-income) और अविकसित (underdeveloped) क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं।
  • दीर्घकालिक (chronic) स्वास्थ्य समस्याएँ और विकलांगता (disabilities) उत्पन्न करती हैं।
  • विभिन्न रोगजनकों (pathogens) जैसे वायरस (virus), बैक्टीरिया (bacteria), परजीवी (parasites), और फंगस (fungi) के कारण होती हैं।
  • सामाजिक कलंक (social stigma) और भेदभाव (discrimination) से जुड़ी होती हैं।
  • ये रोग रोकथाम योग्य (preventable) और उपचार योग्य (treatable) होते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं (healthcare services) और जागरूकता (awareness) की कमी के कारण इनका उन्मूलन (eradication) चुनौतीपूर्ण (challenging) बन जाता है।

भारत में प्रमुख उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Diseases - NTDs)

  • भारत 10 से अधिक प्रमुख NTDs का सबसे अधिक वैश्विक भार (global burden) वहन करता है।

लिंफैटिक फाइलेरियासिस (Elephantiasis - हाथी पांव रोग)

  • कारण: Wuchereria bancrofti (एक परजीवी कृमि - parasitic worm)।
    • संक्रमण का तरीका: संक्रमित मच्छर (mosquito) के काटने से फैलता है।
  • प्रभाव:
    • अंगों, हाथों और जननांगों (genitals) की असामान्य सूजन।
    • विकलांगता (disability) और चलने-फिरने में परेशानी।
  • सरकारी पहल:
    • Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम।
    • 2027 तक इसे समाप्त करने का लक्ष्य।

डेंगू (Dengue)

  • कारण: Dengue virus (Aedes मच्छर द्वारा फैलता है)।
  • लक्षण:
    • तेज़ बुखार।
    • हड्डियों में तेज़ दर्द (Breakbone fever)
    • रक्तस्राव (bleeding)।
  • सरकारी प्रयास:
    • मच्छर नियंत्रण (mosquito control) कार्यक्रम।
    • टीका (vaccine) अनुसंधान (Dengvaxia, Qdenga)।

काला-अजार (Kala-Azar) / आंतरिक लीशमैनियासिस (Visceral Leishmaniasis)

  • कारण: Leishmania परजीवी (parasite), जो बालू मक्खियों (sandflies) द्वारा फैलता है।
  • लक्षण:
    • लिवर और तिल्ली (spleen) का बढ़ना।
    • लंबे समय तक बुखार।
  • सरकारी प्रगति:
    • 2007 से मामलों में 97% की कमी।

हुकवर्म संक्रमण (Hookworm Infection)

  • कारण: Ancylostoma duodenale, Necator americanus (परजीवी कृमि - parasitic worms)।
  • संक्रमण का तरीका:
    • संक्रमित मिट्टी और दूषित पानी के संपर्क में आने से।
  • लक्षण:
    • खून की कमी (anaemia)।
    • थकान (fatigue)।
    • कुपोषण (malnutrition)।
  • सरकारी कार्यक्रम:
    • National Deworming Initiative (राष्ट्रीय कृमिनाशक पहल)।

रेबीज (Rabies)

  • कारण: Rabies virus (संक्रमित जानवर, मुख्य रूप से कुत्ते, के काटने से फैलता है)।
  • लक्षण:
    • हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia) – पानी से डर
    • पक्षाघात (paralysis)।
    • मृत्यु (death)।
  • सरकारी पहल:
    • National Rabies Control Program
    • निःशुल्क पश्च-संक्रमण उपचार (Post-Exposure Prophylaxis - PEP)

कुष्ठ रोग (Leprosy / Hansen’s Disease)

  • कारण: Mycobacterium leprae (बैक्टीरिया - bacteria)।
  • संक्रमण का तरीका:
    • संक्रमित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक संपर्क में रहने से।
  • लक्षण:
    • त्वचा पर दाग (skin patches)।
    • नसों को नुकसान (nerve damage)।
    • अंगों में विकृति (deformities)।
  • सरकारी प्रयास:
    • निःशुल्क Multi-Drug Therapy (MDT)
    • 2005 में इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या (Public Health Problem) के रूप में समाप्त घोषित किया गया।

गिनी वर्म रोग (Guinea Worm Disease) – समाप्त (2000)

  • कारण: Dracunculus medinensis (परजीवी कृमि - parasitic worm)।
  • संक्रमण का तरीका:
    • दूषित पानी पीने से।
  • भारत की उपलब्धि:
    • 2000 में इसे पूरी तरह समाप्त (eliminated) कर दिया गया।

यॉस (Yaws) – समाप्त (2016)

  • कारण: Treponema pallidum (बैक्टीरिया - bacteria)।
  • संक्रमण का तरीका:
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ त्वचा-से-त्वचा (skin-to-skin contact) संपर्क से फैलता है।
  • भारत की उपलब्धि:
  • 2016 में WHO द्वारा यॉस-मुक्त (Yaws-Free) प्रमाणित।

भारत की ट्रेकोमा (Trachoma) को समाप्त करने में सफलता

ट्रेकोमा (Trachoma) क्या है?

  • कारण: Chlamydia trachomatis (बैक्टीरियल संक्रमण - bacterial infection)।
  • संक्रमण का तरीका:
    • आंखों और नाक से निकलने वाले स्राव (eye and nasal secretions) के संपर्क से।
    • मक्खियों (flies) या सीधे संपर्क (direct contact) से।
  • लक्षण:
    • आंखों में जलन (irritation)।
    • लाली (redness)।
    • सूजन (swelling)।
    • अंदर की ओर मुड़ी हुई पलकें (Trichiasis)।
    • अंधापन (blindness)।

भारत की उपलब्धि

  • 1971 में, ट्रेकोमा भारत में 5% अंधेपन (blindness) के मामलों का कारण था; अब यह 1% से भी कम हो गया है।
  • भारत दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में इसे समाप्त करने वाला तीसरा देश बना (नेपाल और म्यांमार के बाद)।

भारत और WHO की पहल (Initiatives)

भारत की पहल (India’s Initiatives)

  • राष्ट्रीय कृमिनाशक कार्यक्रम (National Deworming Program)।
  • राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (National Leprosy Eradication Program - NLEP)।
  • राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (National Rabies Control Program)।
  • सामूहिक औषधि प्रशासन (Mass Drug Administration - MDA) कार्यक्रम (फाइलेरियासिस के लिए)।
  • काला-अजार उन्मूलन कार्यक्रम (Kala-Azar Elimination Program)।

WHO की पहल (WHO’s Initiatives)

  • NTD 2030 रोडमैप (NTD 2030 Roadmap)NTDs के बोझ (burden) को 90% तक कम करने का लक्ष्य।
  • नि:शुल्क दवाएं (Free medicines) और स्वास्थ्य सेवाओं (healthcare support) की उपलब्धता।
  • वैश्विक डेंगू नियंत्रण रणनीति (Global Dengue Control Strategy)।

भारत में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों (NTDs) को नियंत्रित करने की चुनौतियाँ

  • सीमित स्वास्थ्य सुविधाएँ (Limited healthcare facilities) – खासकर ग्रामीण क्षेत्रों (rural areas) में।
  • स्वच्छता और साफ पेयजल की कमी (Lack of sanitation and clean drinking water)।
  • इन बीमारियों के बारे में कम जागरूकता (Low public awareness about these diseases)।
  • वैश्विक वित्तीय सहायता की कमी (Insufficient global financial support)।
  • बीमारियों के दोबारा उभरने का खतरा (Risk of disease resurgence)।
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