चर्चा में क्यों?
ओडिसी नर्तक मायाधर राउत का 22 फरवरी 2025 को दिल्ली स्थित उनके आवास पर 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
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मयाधर राउत के बारे में:
- इनका जन्म 6 जुलाई 1933 में ओडिशा में हुआ था।
- गोटीपुआ नृत्य में 7 वर्ष की आयु में प्रशिक्षण प्रारंभ।
- वर्ष 1944 में पहली बार गोटीपुआ को मंच पर प्रस्तुत किया।
- इनको ओडिशी नृत्य के जनक के रूप में जाना जाता है
ओडिशी नृत्य का पुनरुद्धार:
- ओडिशी नृत्य को शास्त्रीय सिद्धांतों के आधार पर पुनर्गठित किया।
- वर्ष 1952 में कटक में ‘कला विकास केंद्र’ की स्थापना,
- यह ओडिशी नृत्य सिखाने वाला भारत का पहला संस्थान बना।
- वर्ष 1959 में ‘जयंतिका संघ’ की स्थापना की,
- इसने ओडिशी नृत्य के लिए एक संगठित ढांचा तैयार किया।
- संचारी भाव, मुद्रा विनियोग और रस सिद्धांत को ओडिशी में शामिल किया।
- शृंगार रस पर आधारित गीता गोविंद की अष्टपदियों का पहली बार नृत्य रचना की।
महत्वपूर्ण पद एवं नृत्य रचनाएं
- वर्ष 1970 से 1995 तक श्रीराम भारतीय कला केंद्र, दिल्ली में ओडिशी विभाग के प्रमुख रहे।
- वर्ष 1971 में दिल्ली के कमानी सभागार के उद्घाटन के अवसर पर गीता गोविंद की नृत्य प्रस्तुति की।
- रामणी रंजन जेना, अलोका पनिकर और गीता महालिक जैसे प्रसिद्ध ओडिशी नृत्यांगनों को प्रशिक्षण दिया।
प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान:
- ओडिशा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1977)
- साहित्य कला परिषद पुरस्कार (1984)
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1985)
- राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार (2003)
- उपेन्द्र भंज सम्मान (2005)
- टैगोर अकादमी रत्न (2011)
- पद्म श्री सम्मान (ओडिशी नृत्य में उनके अतुलनीय योगदान के लिए
प्रश्न: मायाधर राउत किस शास्त्रीय नृत्य के महान आचार्य थे?
(a) कथक
(b) ओडिसी
(c) भरतनाट्यम
(d) कुचिपुड़ी
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