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 ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को प्रोत्साहन

चर्चा में क्यों

हाल ही में, भारत सरकार ने ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को 50,000 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 

प्रमुख बिंदु 

  • केंद्र सरकार ने यह फैसला ड्रैगन फ्रूट की अंतर्राष्ट्रीय माँग और लागत प्रभाविता को ध्यान में रखकर किया है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15,491 टन ड्रैगन फ्रूट का आयात किया जा रहा है।
  • अभी देश में ड्रैगन फ्रूट की खेती 3000 हेक्टेयर में की जाती है, जिसे सरकार ने अगले पाँच वर्षों में 50,000 हेक्टेयर तक बढाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • जनवरी 2021 में गुजरात सरकार ने इसका नाम ‘कमलम’ कर दिया था। गुजरात एवं हरियाणा सरकारों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को प्रोत्साहन देने के लिये विशेष वित्तीय अनुदान की व्यवस्था भी की है।
  • मुख्यत: यह मैक्सिको और उत्तरी अमेरिका का स्थानीय उत्पाद है, हालाँकि वर्तमान में इसका उत्पादन वियतनाम और कई अन्य देशों में भी किया जा रहा है। इसके उत्पादन में भारत का मिज़ोरम राज्य शीर्ष पर है।

ड्रैगन फ्रूट का महत्व 

  • मानव स्वास्थ्य के लिये अत्यधिक उपयोगी होने के कारण इसे ‘सुपर फ्रूट’ भी कहते हैं।
  • मधुमेह रोगियों के लिये अत्यधिक लाभदायक।
  • इसके उत्पादन के लिये अधिक जल की आवश्यकता नहीं होती।
  • इस प्रकार, शीत क्षेत्रों को छोड़कर सम्पूर्ण भारत इसके उत्पादन के लिये उपयुक्त है।
  • इसके उत्पादन लक्ष्यों की प्राप्ति के बाद इसके मूल्य में तीन-चौथाई तक कमी संभव।
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