सन्दर्भ
- भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अप्रैल 2024 में अपनीं नवीनतम मौद्रिक नीति रिपोर्ट जारी की है।
- आरबीआई की मौद्रिक नीति रिपोर्ट की एक उल्लेखनीय विशेषता "चरम मौसम की घटनाओं" और "जलवायु झटके (climate shocks)" को दी गई प्रधानता है जो न केवल खाद्य मुद्रास्फीति को प्रभावित करती है बल्कि संभावित रूप से ब्याज की प्राकृतिक दर पर व्यापक प्रभाव डालती है, जिससे अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता प्रभावित होती है।

नवीनतम मौद्रिक नीति रिपोर्ट
- इस रिपोर्ट में एक "न्यू-कीनेसियन मॉडल" का उल्लेख किया गया है जो "एक भौतिक जलवायु जोखिम क्षति कार्य प्रणाली को शामिल करता है", इस मॉडल का उपयोग "जलवायु परिवर्तन परिदृश्य के मुकाबले जलवायु परिवर्तन के प्रतितथ्यात्मक व्यापक आर्थिक प्रभाव" का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है।
- रिपोर्ट के लेखक चेतावनी देते हैं कि किसी भी प्रकार की जलवायु शमन नीतियों के अभाव में 2050 तक "दीर्घकालिक (आर्थिक) उत्पादन लगभग 9% तक कम" हो सकता है।
- रिपोर्ट के अनुसार “यदि मुद्रास्फीति हिस्टैरिसीस मजबूत हो जाती है, तो इससे मुद्रास्फीति की उम्मीदें कम हो सकती हैं, और केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता कम होने से मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए उच्च ब्याज दरों की आवश्यकता होगी, जिससे अधिक उत्पादन हानि होगी”।
- मुद्रास्फीति हिस्टैरिसीस तब उभरती है जब उच्च या निम्न मुद्रास्फीति की विस्तारित अवधि भविष्य के लिए उम्मीदों को आकार देती है। उदाहरण के लिए, जब मुद्रास्फीति लगातार कम रहती है, तो यह विश्वास पैदा हो सकता है कि यह प्रवृत्ति जारी रहेगी।
हरित वर्गीकरण(Green Taxonomy)
हरित वर्गीकरण किसी आर्थिक गतिविधि की स्थिरता की साख और संभावित रैंकिंग का आकलन करने के लिए एक रूपरेखा है। या दूसरे शब्दों में हरित वर्गीकरण एक वर्गीकरण प्रणाली है जो परिभाषित करती है कि अर्थव्यवस्था में कौन सी आर्थिक गतिविधियाँ और संपत्तियाँ "हरित" या पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ हैं।
आरबीआई और हरित वर्गीकरण
- आरबीआई ने 'जलवायु जोखिम और टिकाऊ वित्त' पर अपने जुलाई 2022 के पत्र में, आरबीआई ने हरित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को संबोधित करने के लिए वृद्धिशील प्रगति की चर्चा की है।
- इस पत्र में यह भी स्वीकार किया गया है, कि ‘भारत को 2070 तक अपनी शुद्ध शून्य महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए 17 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पूँजी के निवेश की आवश्यकता है’।
- उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथियों, विशेष रूप से यूरोपीय सेंट्रल बैंक, ने संपूर्ण यूरोज़ोन की आर्थिक मूल्य श्रृंखला के लिए हरित वर्गीकरण तैयार करने में सहायता की है।
- आरबीआई और वित्त मंत्रालय, विकासशील दुनिया से प्रेरणा ले सकते हैं, विशेष रूप से आसियान क्षेत्र से, इस क्षेत्र में बहुस्तरीय हरित वर्गीकरण प्रणाली(Multi layered Green Taxonomy) एक जीवित दस्तावेज़ के रूप में संभावित सतत भविष्यनोमुखी मार्ग के विचारों के साथ लगातार अद्यतन होता जा रहा है।
- RBI द्वारा ₹16,000 करोड़ मूल्य के सॉवरेन ग्रीन बांड जारी करना और विदेशी संस्थागत निवेशकों को भविष्य की हरित सरकारी प्रतिभूतियों में भाग लेने की अनुमति देकर संसाधन पूल का विस्तार करना स्वागत योग्य कदम है।