New
GS Foundation (P+M) - Delhi: 26 March, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj: 30 March, 10:30 AM Call Our Course Coordinator: 9555124124 Request Call Back GS Foundation (P+M) - Delhi: 26 March, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj: 30 March, 10:30 AM Call Our Course Coordinator: 9555124124 Request Call Back

तटीय नौवहन विधेयक, 2024

(प्रारंभिक परीक्षा : समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)

संदर्भ

लोकसभा द्वारा 3 अप्रैल 2025 को ‘तटीय नौवहन विधेयक, 2024’ पारित किया गया। 

तटीय नौवहन विधेयक, 2024 के बारे में 

  • परिचय : यह विधेयक वर्ष 1958 के ‘मर्चेंट शिपिंग एक्ट’ को अद्यतन करते हुए आधुनिक प्रावधानों को शामिल करने एवं तटीय व्यापार को सरल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने पर केंद्रित है।
  • उद्देश्य : तटीय व्यापार के लिए एक समर्पित कानूनी ढांचा प्रदान प्रदान करना, जिससे भारतीय समुद्री क्षेत्र वहनीय, विश्वसनीय और सतत परिवहन का माध्यम बन सके।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान 

  • तटीय व्यापार की परिभाषा में विस्तार : विधेयक तटीय व्यापार के तहत माल और यात्रियों की ढुलाई के साथ ही मछली पकड़ने को छोड़कर अन्वेषण, अनुसंधान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को शामिल करता है।
  • तटीय व्यापार और अन्य उद्देश्यों के लिए लाइसेंस : विधेयक में पुराने अधिनियम के तहत तटीय व्यापार करने वाले पूरी तरह से भारतीय व्यक्तियों के स्वामित्व वाले जहाजों को लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। 
  • लाइसेंस को रद्द करने के स्पष्ट आधार : पुराने अधिनियम के तहत महानिदेशक को लाइसेंस में संशोधन या उसे रद्द करने का अधिकार दिए गए है, लेकिन इसके आधार स्पष्ट नहीं थे। 
    • प्रस्तावित विधेयक में लाइसेंस के संशोधन या उसे निरस्त करने के आधारों को स्पष्ट किया गया है जिसमें लाइसेंस की शर्तों या मौजूदा कानून का उल्लंघन या महानिदेशक के निर्देशों का पालन न करना शामिल हैं।
  • दंड के प्रावधानों में बदलाव: पुराने अधिनियम के तहत लाइसेंस के बिना तटीय व्यापार करने या समुद्र में जहाज ले जाने पर छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान था। 
    • प्रस्तावित विधेयक इस दंड में बदलाव करते हुए अधिकतम 15 लाख रुपए तक या लाइसेंस के बिना यात्रा से प्राप्त होने वाले लाभ का चार गुना, इनमें से जो भी अधिक हो, जुर्माने का प्रावधान करता है। 
  • तटीय और अंतर्देशीय शिपिंग रणनीति योजना: विधेयक ,कानून लागू करने के दो साल के भीतर केंद्र सरकार को राष्ट्रीय तटीय और अंतर्देशीय शिपिंग रणनीति योजना बनाने का प्रावधान करता है।
  • राष्ट्रीय तटीय शिपिंग डाटाबेस का निर्माण : विधेयक के तहत राष्ट्रीय तटीय शिपिंग डाटाबेस बनाने का प्रावधान किया गया है जिससे व्यापार की पारदर्शिता और प्रशासनिक समन्वय बढ़ेगा।
  • तटीय जलमार्गों को अंतर्देशीय जलमार्गों से जोड़ना : विधेयक में तटीय जलमार्गों को अंतर्देशीय जलमार्गों से जोड़ने का प्रावधान किया गया है जिससे सड़क और रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम होगा तथा एक सस्ता, हरित और विश्वसनीय परिवहन विकल्प को मजबूती मिलेगी। 

अन्य प्रावधान 

  • विधेयक के अंतर्गत तटीय व्यापार को आसान बनाने के लिए प्राथमिकता वाले बर्थिंग, ग्रीन क्लीयरेंस चैनल और बंकर ईंधन पर जीएसटी कटौती जैसे सुधारों को भी शामिल किया गया है। 
    • इससे भारतीय जहाज मालिकों की विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम होगी और देश में तटीय नौवहन को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
  • इस विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। 
  • यह सहकारी संघवाद (Co-operative Federalism) की भावना पर आधारित है, जिसमें राज्य समुद्री बोर्डों और विशेषज्ञों की भागीदारी से एक राष्ट्रीय रणनीतिक योजना बनाई जाएगी । 
    • यह योजना न केवल तटीय व्यापार को मजबूत करेगी, बल्कि ओडिशा, कर्नाटक, गोवा जैसे राज्यों में नदी और तटीय जलमार्गों के विकास को भी बढ़ावा देगी।

विधेयक के प्रमुख लाभ 

  • विधेयक भारत में समुद्री कानूनों को सरल और प्रभावी बनाते हुए अनुपालन बोझ को कम करेगा।
  • विधेयक ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन देगा, जिससे भारतीय जहाज निर्माण, बंदरगाह सेवाओं और नौवहन क्षेत्र में हजारों नौकरियां सृजित होंगी।
  • विधेयक तटीय व्यापार के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप एक समर्पित कानूनी ढांचा भी प्रदान करता है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR