New
GS Foundation (P+M) - Delhi: 26 March, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj: 30 March, 10:30 AM Call Our Course Coordinator: 9555124124 Request Call Back GS Foundation (P+M) - Delhi: 26 March, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj: 30 March, 10:30 AM Call Our Course Coordinator: 9555124124 Request Call Back

ट्रांस-फैट का उन्मूलन Trans-Fat Elimination

TRANSFAT

ट्रांस-फैट क्या है? (What is Trans-Fat?)

  • ट्रांस-फैट्स (Trans-Fats), जिन्हें असंतृप्त वसायुक्त अम्ल (unsaturated fatty acids) भी कहा जाता है, आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत (partially hydrogenated) किए गए वसा होते हैं।
  • ये बनावट (texture), शेल्फ-लाइफ (shelf life), और स्थिरता (stability) बढ़ाने के लिए प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (processed foods) में उपयोग किए जाते हैं।
  • स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक वसा (worst type of fats) माने जाते हैं।

ट्रांस-फैट के प्रकार (Types of Trans-Fats)

ट्रांस-फैट को उनके स्रोत (sources) के आधार पर दो श्रेणियों में बाँटा जाता है:

  • प्राकृतिक ट्रांस-फैट (Natural Trans-Fats) / जुगाली करने वाले जानवरों से प्राप्त (Ruminant Trans-Fats)
  • मांस और डेयरी उत्पादों (meat & dairy products) में थोड़ी मात्रा में पाए जाते हैं, जैसे:बीफ (beef), भेड़ का मांस (lamb), मक्खन (butter) आदि।
  • यह जुगाली करने वाले जानवरों (ruminant animals) के पाचन तंत्र (stomach) में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होते हैं।
  • यदि सीमित मात्रा (moderation) में सेवन किया जाए, तो अधिक हानिकारक नहीं होते।
  • कृत्रिम ट्रांस-फैट (Artificial Trans-Fats) / औद्योगिक ट्रांस-फैट (Industrial Trans-Fats)
  • एक औद्योगिक प्रक्रिया (industrial process) के माध्यम से बनाए जाते हैं, जिसमें वनस्पति तेलों (vegetable oils) में हाइड्रोजन (hydrogen) मिलाया जाता है, जिससे तरल वसा (liquid fats) ठोस वसा (solid fats) में बदल जाती है।
  • इन्हें आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल (Partially Hydrogenated Oils - PHOs) कहा जाता है।
  • प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (processed foods) में PHO की मात्रा 25-45% तक हो सकती है।
  • कोई पोषण संबंधी लाभ (nutritional benefits) नहीं होते, लेकिन शेल्फ-लाइफ (shelf life) और बनावट (texture) को बेहतर बनाने के लिए फास्ट फूड (fast foods) और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं।

अन्य प्रकार के वसा की तुलना (Comparison with Other Types of Fats)

वसा का प्रकार (Type of Fat)

स्रोत (Sources)

स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Impact)

असंतृप्त वसा ("अच्छे वसा" - Unsaturated Fats)

नट्स (nuts), एवोकाडो (avocados), वनस्पति तेल (vegetable oils)

हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक (Beneficial for heart health), कम कैलोरी (low in calories)

संतृप्त वसा (Saturated Fats)

पशु उत्पाद (butter, cheese, red meat)

अधिक सेवन से कोलेस्ट्रॉल स्तर (cholesterol levels) बढ़ सकता है।

ट्रांस-फैट ("बुरे वसा" - Trans-Fats)

प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (processed foods), मार्जरीन (margarine), डीप-फ्राइड फूड (deep-fried foods)

हृदय रोग (heart diseases), मोटापा (obesity), और मधुमेह (diabetes) का खतरा बढ़ाता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids) क्या हैं?

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acids) पॉलीअनसैचुरेटेड वसा (polyunsaturated fats) हैं, जिन्हें मानव शरीर स्वयं उत्पन्न नहीं कर सकता (cannot produce on its own)

ओमेगा-3 फैटी एसिड के प्रकार (Types of Omega-3 Fatty Acids)

  • EPA (Eicosapentaenoic Acid) और DHA (Docosahexaenoic Acid)समुद्री खाद्य पदार्थों (seafood) में पाए जाते हैं, जैसे सामन (salmon), मैकेरल (mackerel)
  • ALA (Alpha-Linolenic Acid)वनस्पति स्रोतों (plant-based sources) में पाया जाता है, जैसे अलसी के बीज (flaxseeds), चिया सीड्स (chia seeds), अखरोट (walnuts)

ओमेगा-3 के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Omega-3s):

  • शरीर में सूजन (inflammation) को कम करता है।
  • ट्राइग्लिसराइड (triglyceride) स्तर को कम करता है (यह रक्त में मौजूद एक प्रकार का वसा होता है)।
  • मस्तिष्क स्वास्थ्य (brain health) को समर्थन देता है और हृदय रोग (heart disease) के जोखिम को कम करता है।

ट्रांस-फैट्स के स्वास्थ्य जोखिम (Health Risks of Trans-Fats)

  • ट्रांस-फैट्स (Trans-Fats) का अधिक सेवन कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (serious health conditions) से जुड़ा हुआ है, जैसे:
  • LDL ("खराब" कोलेस्ट्रॉल - Bad Cholesterol) बढ़ता है और HDL ("अच्छा" कोलेस्ट्रॉल - Good Cholesterol) कम होता है।
  • हृदय रोग (Heart Disease) और स्ट्रोक (Stroke) का खतरा बढ़ता है।
  • मोटापा (Obesity) और टाइप-2 मधुमेह (Type-2 Diabetes) का खतरा बढ़ता है।
  • क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (Chronic Inflammation) – लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रति वर्ष 500,000 मौतें (deaths) ट्रांस-फैट के सेवन से जुड़ी होती हैं।

ट्रांस-फैट्स को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदम (Steps Taken to Regulate Trans Fats)

भारत में उठाए गए कदम (India’s Measures)

नियामक संस्था (Regulatory Body):

  • भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI - Food Safety and Standards Authority of India) ट्रांस-फैट्स को नियंत्रित करता है।

प्रमुख पहल (Key Initiatives):

  • "ट्रांस-फैट-फ्री" (Trans-Fat-Free) लोगो – यह एक स्वैच्छिक लेबल (voluntary label) है, जो ट्रांस-फैट मुक्त उत्पादों (TFA-free products) को बढ़ावा देता है।

कानूनी सीमा (Legal Limits):

  • 2021 – तेलों और वसा (oils & fats) में अधिकतम ट्रांस-फैट सीमा 3% कर दी गई।
  • 2022 – इसे और घटाकर 2% कर दिया गया।

जागरूकता अभियान (Awareness Campaigns):

  • Eat Right India Movement – स्वस्थ खानपान की आदतों (healthier eating habits) को बढ़ावा देता है।
  • Heart Attack Rewind – जन जागरूकता बढ़ाने के लिए एक जनसंचार अभियान (mass media campaign)

वैश्विक स्तर पर उठाए गए कदम (Global Measures)

  • WHO का REPLACE फ्रेमवर्क (2018) – ट्रांस-फैट्स को समाप्त करने की वैश्विक रणनीति:
  • कड़े नियम और नीति प्रवर्तन (Regulations & policy enforcement)
  • सार्वजनिक जागरूकता अभियान (Public awareness campaigns)
  • खाद्य उद्योग (food industry) के साथ सहयोग कर PHOs (Partially Hydrogenated Oils) को खाद्य उत्पादन (food production) से हटाना।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR