New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

IMPORTANT TERMINOLOGY

पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।

प्रतिदिन की सबसे महत्वपूर्ण News पढ़ने के लिए यहाँ Click करें

1. डेटा फिड्युसरी (Data Fiduciary)

17-Nov-2025

डेटा फिड्युसरी वह व्यक्ति, संस्था या संगठन है जिसे किसी अन्य व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा का सुरक्षित संग्रह, जिम्मेदार प्रबंधन और वैध उपयोग करने का अधिकार और दायित्व सौंपा जाता है।

2. एरोसोल फोर्सिंग (Aerosol Forcing)

15-Nov-2025

वायुमंडल में उपस्थित सूक्ष्म कणों या एरोसोल्स द्वारा पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन में बदलाव की प्रक्रिया को एरोसोल फोर्सिंग कहते हैं। ये कण सूर्य की किरणों को अवशोषित या परावर्तित कर सकते हैं, जिससे सतह का तापमान घट या बढ़ सकता है।

3. एंथ्रोपोजेनिक प्रभाव (Anthropogenic Impact)

14-Nov-2025

मानव गतिविधियों; जैसे उद्योग, कृषि, वनों की कटाई, शहरीकरण और प्रदूषण के कारण पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को एंथ्रोपोजेनिक प्रभाव कहते हैं। यह जैव विविधता में कमी, जल और वायु प्रदूषण, मृदा अपरदन, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के असंतुलित उपयोग जैसी समस्याओं को जन्म देता है।

4. एपिस्टेमोलॉजी (Epistemology)

13-Nov-2025

यह ज्ञान का दार्शनिक अध्ययन, जो यह निर्धारित करता है कि ज्ञान क्या है, इसके स्रोत कौन-कौन से हैं, इसकी सत्यता और सीमा क्या है और हम किस प्रकार यह जान सकते हैं कि कोई विश्वास या धारणा प्रमाणिक और सही है। इसे ज्ञानमीमांसा भी कहते हैं।

5. सार्वजनिक-निजी साझेदारी (Public-Private Partnership– PPP)

12-Nov-2025

सार्वजनिक-निजी साझेदारी एक ऐसा अनुबंध है, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर किसी परियोजना या सेवा का निर्माण, संचालन और वित्तपोषण करते हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और जोखिम साझा करना है। यह अवसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में लागू होता है।

6. सामाजिक पूंजी (Social Capital)

11-Nov-2025

सामाजिक पूंजी वह शक्ति है जो समाज में आपसी विश्वास, सहयोग और रिश्तों से उत्पन्न होती है। यह लोगों और समूहों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने, संसाधनों का साझा उपयोग करने और समस्याओं को हल करने में सक्षम बनाती है। मजबूत सामाजिक पूंजी समुदाय और राष्ट्र के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विकास में मदद करती है और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देती है।

7. नैतिक जोखिम (Moral Hazard)

10-Nov-2025

नैतिक जोखिम वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति या संगठन को सुरक्षा, बीमा या संरक्षण प्राप्त होता है और इस वजह से वह अपने कार्यों में अधिक सतर्क नहीं रहता या जोखिमपूर्ण व्यवहार अपनाता है। इसका अर्थ है कि जब कोई वित्तीय या सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध हो, तो व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों या सतर्कता में कमी कर देता है।

8. कॉग्निटिव कंप्यूटिंग (Cognitive Computing)

08-Nov-2025

कॉग्निटिव कंप्यूटिंग वह उन्नत कंप्यूटिंग प्रणाली है जो मानव मस्तिष्क की तरह सोचने, सीखने और निर्णय लेने में सक्षम होती है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली जटिल डेटा का विश्लेषण करके पैटर्न पहचानती है, पूर्वानुमान करती है और वास्तविक समय में बुद्धिमान निर्णय लेने में मदद करती है।

9. बायोरेमेडिएशन (Bioremediation)

07-Nov-2025

बायोरेमेडिएशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया और कवक) या पौधों का उपयोग करके प्रदूषित वातावरण (मिट्टी, पानी, या वायु) से प्रदूषकों को हटाने, निष्क्रिय करने या उनकी विषाक्तता को कम करने का कार्य किया जाता है। यह एक प्राकृतिक और टिकाऊ सफाई तकनीक है।

10. डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)

06-Nov-2025

डॉप्लर प्रभाव वह परिघटना है, जिसमें तरंग स्रोत और प्रेक्षक के बीच सापेक्ष गति होने पर तरंगों की आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन प्रतीत होता है। यदि स्रोत प्रेक्षक की ओर बढ़ता है तो आवृत्ति बढ़ती है (नीली ओर परिवर्तन) और दूर जाने पर घटती है (लाल ओर परिवर्तन)। इसका उपयोग खगोलशास्त्र, रडार और चिकित्सा में होता है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR