पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।
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10-Aug-2026
फुबिंग वह व्यवहार है जिसमें कोई व्यक्ति अपने साथ उपस्थित लोगों की उपेक्षा करके मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल उपकरणों में व्यस्त रहता है। यह शब्द "फोन (Phone)" और "स्नबिंग (Snubbing)" से मिलकर बना है। फुबिंग सामाजिक संबंधों, संवाद, विश्वास तथा मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और आमने-सामने के संचार की गुणवत्ता को कम करता है।
07-Aug-2026
अमरम (अमरम्) प्राचीन और मध्यकालीन भारत, विशेषकर विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक व सैन्य व्यवस्था के अंतर्गत दी जाने वाली भूमि या भू-राजस्व का अनुदान था। राजा द्वारा यह भूमि अपने 'नायक' (सैन्य सरदारों) को उनके द्वारा साम्राज्य के लिए दी जाने वाली उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं के बदले प्रदान की जाती थी। इस भूमि से प्राप्त राजस्व का उपयोग सैनिक अपनी टुकड़ी के रखरखाव और क्षेत्रीय शासन चलाने के लिए करते थे।
06-Aug-2026
संवर जैन दर्शन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसका अर्थ है कर्मों के नए बंधन को रोकना। जब व्यक्ति अपने मन, वचन और कर्म को संयमित रखकर राग, द्वेष, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों पर नियंत्रण करता है, तब नए कर्म आत्मा से नहीं जुड़ते। यही अवस्था संवर कहलाती है, जो मोक्ष प्राप्ति की दिशा में एक आवश्यक साधन मानी जाती है।
03-Aug-2026
तनियूर दक्षिण भारत, विशेषकर चोल काल में, ऐसा विशेष गाँव था जिसे प्रशासनिक और राजस्व संबंधी मामलों में अन्य गाँवों से अलग स्वतंत्र दर्जा प्राप्त होता था। ऐसे गाँव प्रायः ब्राह्मण बस्तियाँ (ब्राह्मदेय) होते थे और उनका शासन स्थानीय सभा द्वारा संचालित किया जाता था। उन्हें कर, भूमि प्रबंधन तथा न्यायिक मामलों में पर्याप्त स्वायत्तता प्राप्त रहती थी।
01-Aug-2026
भारतीय दर्शन परंपरा में षड्दर्शन से तात्पर्य उन छह प्रमुख आस्तिक दर्शनों से है, जो वेदों की प्रामाणिकता और सत्ता को स्वीकार करते हैं। इनमें सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत शामिल हैं। ये दर्शन सृष्टि, आत्मा, ईश्वर और जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हेतु तर्कसंगत, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत करते हैं।
31-Jul-2026
समैयापंथी जैन धर्म का एक सुधारवादी संप्रदाय है। यह संप्रदाय बाहरी आडंबर, कर्मकांड और मूर्तिपूजा की अपेक्षा आत्मचिंतन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन तथा आंतरिक साधना पर अधिक बल देता है। इसका उद्देश्य आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति करना है।
30-Jul-2026
परौती वह कृषि भूमि होती है जिसे एक या अधिक फसली मौसम के लिए जानबूझकर बिना खेती किए खाली छोड़ दिया जाता है, ताकि उसकी उर्वरता और नमी पुनः प्राप्त हो सके। इस अवधि में भूमि को विश्राम मिलता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, खरपतवार एवं कीटों का नियंत्रण होता है और अगली फसल का उत्पादन बेहतर होता है।
29-Jul-2026
कम्माल दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु और केरल का एक पारंपरिक शिल्पकार समुदाय है। इसमें लोहार, बढ़ई, स्वर्णकार, ताम्रकार तथा पत्थर पर नक्काशी करने वाले कारीगर शामिल होते हैं। मध्यकालीन दक्षिण भारतीय समाज में यह समुदाय कृषि, मंदिर निर्माण, धातु शिल्प और हस्तकला के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
28-Jul-2026
पायरोक्यूमुलोनिम्बस एक विशेष प्रकार का विशाल तूफानी बादल है, जो बड़े जंगलों की आग, ज्वालामुखी विस्फोट या अत्यधिक गर्मी से उठने वाले धुएँ और गर्म हवा के कारण बनता है। यह बादल तेज वर्षा, बिजली, तेज हवाएँ तथा कभी-कभी नई आग फैलाने वाली बिजली भी उत्पन्न कर सकता है।
27-Jul-2026
कानकुत भूमि की उपज का अनुमान लगाकर लगान या राजस्व निर्धारित करने की एक पारंपरिक पद्धति थी। इसमें खेत की फसल का निरीक्षण कर उसकी संभावित पैदावार का आकलन किया जाता था और उसी आधार पर कर तय किया जाता था। यह व्यवस्था विशेष रूप से मध्यकालीन भारत, विशेषकर मुगल शासन में प्रचलित थी।