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मणिपुर में जानवरों के लिए सट्टेबाजी

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – बिंटुरोंग, वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम,1972

संदर्भ 

  • मणिपुर के कुछ हिस्सों में सट्टेबाजी के पुरस्कार के रूप में मृत या जीवित जंगली जानवरों को पेश किया जा रहा है।
  • लोगों द्वारा इन जानवरों को जीतने के लिए लिए रैफ़ल ड्रा टिकट खरीदने के उदाहरण सामने आए है। 
    • पक्षी या जानवर के शरीर का हिस्सा जितना बड़ा या दुर्लभ होगा, टिकट की कीमत उतनी ही अधिक होगी।
  • इन जानवरों में मुख्य रूप से बिंटुरोंग तथा उड़ने वाली लोमड़ी, भालू ,जंगली सूअर और हिरण तथा अन्य जंगली जानवर शामिल हैं।
  • मणिपुर वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वे नियमित रूप से वन्यजीव अपराध और 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए निर्धारित अपराधों पर जागरूकता अभियान चला रहे है।

बिंटुरोंग

  • बिंटुरोंग, एक मध्यम आकार का स्तनपायी है, ये विवर्रिडे परिवार से संबंधित है, जिसमें सिवेट, लिनसांग और जेनेट शामिल हैं।
  • इसका वैज्ञानिक नाम, आर्कटिकटिस बिंटुरॉन्ग है।
  • बिंटुरोंग भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, चीन, कंबोडिया, लाओस, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार, फिलीपींस और इंडोनेशिया के उष्णकटिबंधीय वनों में पाए जाते है।
  • बिंटूरोंग सर्वाहारी होते है , जो छोटे स्तनधारियों, पक्षियों , मछलियों, केंचुओं , कीड़ों और फलों को खाते है।
  • इनके मूत्र में 2-एसिटाइल-1-पाइरोलाइन पाया जाता है,  यह एक रासायनिक यौगिक है, जो पॉपकॉर्न को इसकी सुगंध देता है।
  • इनके पास बहुत लंबी पूंछ होती है जिसका उपयोग वे पेड़ों की शाखाओं को पकड़ने तथा चलते समय संतुलन बनाने के लिए करते है।
  • बिंटुरोंग को Bearcats भी कहा जाता है, लेकिन ये भालू या बिल्लियों से निकटता से संबंधित नहीं है।
  • ये जानवर अपना ज्यादातर समय पेड़ों के ऊपर बिताते है।
  • यह अच्छी तरह से तैर सकते हैं तथा रात और दिन दोनों में अच्छी दृष्टि रखते हैं।
  • बिंटुरोंग का मनुष्यों के अलावा कोई ज्ञात शिकारी नहीं है।
  • इन्हें IUCN द्वारा संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • ये भारतीय वन्यजीव (संरक्षण अधिनियम), 1972 की अनुसूची 1 तथा CITES की परिशिष्ट III के अंतर्गत सूचीबद्ध है।

Bearcats

वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972

  • 1972 में, भारतीय संसद ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम पारित किया , जो देश के वन्यजीवों (वनस्पतियों और जीवों) के संरक्षण की अनुमति देता है।
  • यह अधिनियम कई निर्दिष्ट जानवरों, पक्षियों और पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ पूरे देश में पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों के एक नेटवर्क के विकास की अनुमति देता है।
  • इस अधिनियम ने निर्दिष्ट जानवरों को पकड़ना, उनका वध करना, बेचना, खरीदना या रखना भी अवैध बना दिया, जिसमें उनके पंख भी शामिल हैं।
  • यह वन्यजीव सलाहकार बोर्ड, वन्यजीव वार्डन की नियुक्ति, उनकी शक्तियों, कर्तव्यों आदि का प्रावधान करता है।
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