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स्मॉग टावर (Smog Tower)

वर्ष 2014 में, डब्ल्यू.एच.ओ. द्वारा दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया था। औद्योगिक तथा वाहन प्रदूषण, आस-पास के क्षेत्रों में पराली के जलने से उत्पन्न धुआँ एवं अन्य कारणों के चलते दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिये 'स्मॉग टावरों' की स्थापना का निर्णय लिया गया है।

  • स्मॉग टावर को बड़े पैमाने पर वायु शोधक (Air Purifier) के रूप में कार्य करने हेतु डिज़ाइन किया गया है। यह फिल्टर की कई परतों से सुसज्जित होता है तथा वायु में निलम्बित धूल कणों को आकर्षित कर लेता है, जो इन फिल्टरों से होकर गुज़रते हैं।
  • इस प्रकार के टावरों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वायु में उपस्थित पार्टिकुलेट मैटर के भार को कम करना है। 20 मीटर (65 फीट) की ऊँचाई वाले ये टावर वायु में उपस्थित सभी आकार के कणों को अवशोषित करने की क्षमता रखते हैं। इन टावरों के शीर्ष पर लगे पंखे वायु को खींचकर फिल्टरों से होकर गुज़ारते हैं और अंततः इस वायु को टावर के निचले हिस्से से बाहर निकाल दिया जाता है।
  • दिल्ली में स्थापित होने वाले इन टावरों में कार्बन नैनोफाइबर का उपयोग प्रमुख घटक के रूप में किया जाएगा। इन्हें मीनार की परिधि के साथ 20 मीटर की ऊँचाई पर लगाया जाएगा।
  • वर्ष 2015 में, नीदरलैंड के रॉटरडैम में ऐसा पहला टावर बनाया गया था। दिल्ली में स्मॉग टावर की स्थापना आई.आई.टी. दिल्ली, मुम्बई एवं मिनेसोटा विश्वविद्यालय (अमेरिका) के सहयोग से की जाएगी। ध्यातव्य है कि दिल्ली में कुछ स्थानीय व्यापारियों के आर्थिक सहयोग से एक 20 फीट ऊँचा प्रोटोटाइप स्मॉग टावर स्थापित किया गया था, जिसके परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।
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